लेस्लीगंज मिडिल स्कूल के मैदान में संत शिरोमणि गुरु रविदासजी की 649वीं जयंती मनाई गई, पांकी विधायक ने फिता काट कर किया उद्घाटन।
पलामू न्यूज Live//पलामू जिले के पांकी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नीलाम्बर-पीताम्बरपुर प्रखंड मुख्यालय के मिडिल स्कूल मैदान में रविवार को संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती सह सम्मान समारोह का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता के भाव के साथ किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि पांकी विधायक कुश्वाहा डॉ शशिभूषण मेहता, विशिष्ट अतिथि पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष प्रभा देवी, पूर्वी जिला परिषद बिजय राम ने संयुक्त रूप से उपस्थित होकर संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के तस्वीर पर पुष्प अर्पित एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का नीला रिबन काट कर शुभारंभ किया। मौके पर समिति के प्रखंड अध्यक्ष पंकज कुमार एवं सदस्यों द्वारा सभी अतिथियों को फूल-माला, बुके एवं अंगवस्त्र भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।
इस कार्यक्रम में भक्ति एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु रविदास जी के समतामूलक विचारों, सेवा और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया गया। मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पांकी विधायक ने कहा कि संत रविदासजी (15वीं-16वीं सदी) का एक महान भारतीय कवि, संत और समाज सुधारक थे।
जिन्होंने भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जातिगत भेदभाव का खंडन किया और आध्यात्मिक समानता का उपदेश दिया। संत रविदास जी के विचार आज भी सामाजिक समानता, भाईचारे और समरस समाज के निर्माण के लिए मार्गदर्शक हैं। उनके भजन सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं और वे रविदासिया पंथ के केंद्रीय व्यक्ति हैं जो ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ जैसे वचनों के लिए प्रसिद्ध हैं।
पूर्व अध्यक्ष जिला परिषद पलामू प्रभा देवी ने उनके जीवन और पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी का जन्म वाराणसी (काशी) में माघ पूर्णिमा, संवत् 1433 (लगभग 1433 ईस्वी) को हुआ था। वे मोची (चर्मकार) समुदाय में जन्मे थे और जूते बनाने का पुश्तैनी काम करते थे जिसे उन्होंने गर्व से अपनाया था। कबीर और नामदेव के समकालीन थे और उनसे प्रभावित मीराबाई भी उनकी शिष्या थीं।
उन्होंने समाज में व्याप्त छुआछूत, जाति-पाति और धार्मिक पाखंड का कड़ा विरोध किया और सभी के लिए आध्यात्मिक स्वतंत्रता और भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने निराकार ईश्वर में विश्वास रखा और सच्ची भक्ति तथा आंतरिक शुद्धि पर जोर दिया न कि बाहरी आडंबरों पर विश्वास किया। उनकी भक्तिमय कविताएं और भजन है जिनमें ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ जैसे प्रसिद्ध वाक्य है जो जनमानस पर गहरा प्रभाव डालते हैं और गुरु ग्रंथ साहिब का हिस्सा हैं।
उन्हें संत शिरोमणि, भगत रविदास के रूप में पूजनीय माना जाता है और वे रविदासिया धार्मिक आंदोलन के केंद्रबिंदु हैं जो उन्हें एक गुरु के रूप में मानते हैं, उनके विचार आज भी सामाजिक समानता और आध्यात्मिक मार्ग के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
प्रखंड स्तरीय इस कार्यक्रम के अध्यक्ष पंकज कुमार ने कहा कि जिस तरह से भारतीय संविधान निर्माता हमारे पूर्वज बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर जी हैं। जिनके द्वारा लिखित 32 किलो का भारतीय संविधान भारत देश ही नहीं पूरे विश्व में सबसे बड़ा और पावरफुल संविधान हैं जिसके अनुसार देश चल रहा है। उसी अनुसार (15वी-16वी सदी) में जन्मे रविदास परिवार का मुख्य आध्यात्मिक ज्ञान से परिपूर्ण व्यक्ति संत शिरोमणि गुरु रविदास जी भी थे।
संत रविदास को भक्ति आंदोलन के एक अग्रणी प्रवर्तक के रूप में देखा जाता है, जिनका जन्म 1376 ईसवीं में माघ मास की पूर्णिमा को गोवर्धनपुर गांव (वाराणसी) में हुआ था। उनके पिता संतोख दास पेशे से चर्मकार थे और मां कर्मा बेहद धार्मिक प्रवृत्ति की स्त्री थी रविवार के दिन जन्म होने के कारण उनका नाम रविदास रखा गया था।
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी को यह उपाधि उनके द्वारा जाति-पाति, छुआछूत के खंडन, समाज में समानता (समरसता) के संदेश और “मन चंगा तो कठौती में गंगा” जैसी आध्यात्मिक शिक्षाओं के कारण दी गई थी। उन्होंने 15वीं-16वीं शताब्दी के भक्ति आंदोलन के दौरान प्रेम, मानवता और कर्म को सर्वोपरि मानकर समाज में बड़ा सुधार किया इस लिए आज भी उनकी जयंती बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाई जाती है।
इस गरिमामय आयोजन में पूर्व जिला पार्षद सह अध्यक्ष पलामू श्रीमती प्रभा देवी, पुर्वी जिला परिषद बिजय राम, विश्वनाथ राम, प्रोफेसर बच्चन ठाकुर, विधायक प्रतिनिधि सुनील कुशवाहा, मुखिया बिगन महतो, पूर्व मुखिया अरविंद कुमार राम, गिरजा राम, कृष्णा कुमार, अखिलेश कुमार, अवधेश राम, विनय कुमार, अनुज कुमार, उमेश राम, उपेन्द्र कुमार सहित प्रखंड व जिला परिषद प्रतिनिधिगण, पंचायत प्रतिनिधि, समाजसेवी, बुद्धिजीवी तथा सैकड़ों महिला पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।

