सत्ता विशेषाधिकार और कानून से टकराव, भाजपा विधायक पर टोलकर्मियों से मारपीट सामाजिक तनाव भड़काने का आरोप।

पलामू न्यूज Live//देश मे जब वीआईपी संस्कृति कानून के समक्ष समानता और जनप्रतिनिधियों को जबाबदेही पर बहस चल रही है। इसी बीच झारखंड राज्य अंतर्गत पांकी विधानसभा के भाजपा विधायक कुश्वाहा डॉ. शशिभूषण मेहता के उपर टोलकर्मियों से अभद्रता और थप्पड़ मारने का आरोप लगा है। यह मामला केवल एक टोल विवाद नही बल्कि सत्ता का दुरुपयोग प्रशासनिक चुप्पी और सामाजिक विभाजन की व्यापक समस्या को उजागर करती है। पांकी विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक कुश्वाहा डॉ. शशिभूषण मेहता एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में हैं। ताज़ा मामला रांची के मांडर टोल प्लाजा से जुड़ा हुआ है जहां टोल टैक्स भुगतान को लेकर हुए विवाद में टोलकर्मियों से अभद्रता और एक टोलकर्मी को थप्पड़ मारने का आरोप सामने आया है। विवाद का कारण 31 दिसंबर को उनकी पत्नी की गाड़ी को टोल टैक्स के लिए टोल प्लाजा पर रोकना रहा है। इसी बात से पांकी विधायक कुश्वाहा डॉ शशिभूषण मेहता बिफरे हुए थे कि हमारे परिवार की गाड़ी कैसे रोकी गई।

विधायक का दावा।

जानकारी के अनुसार 31 दिसंबर 2025 को विधायक की पत्नी मेदिनीनगर से रांची जा रही थीं। टोल प्लाजा पर टोल टैक्स के लिए वाहन रोके जाने पर विवाद बढ़ गया। विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता का कहना है कि टोल प्लाजा पर वाहन रोके जाने के कारण उनके परिवार की दिल्ली जाने वाली फ्लाइट छूट गई। जबकि उन्हें सेवा विमान से दिल्ली जाना था, टोल प्लाजा पर तैनात कर्मियों का कहना है कि नियमों के अनुसार टोल टैक्स में छूट केवल जनप्रतिनिधि (विधायक) को मिलती है, परिवार के सदस्यों, समर्थकों या अन्य वाहनों को नहीं। उनका आरोप है कि नियम बताने पर विधायक ने आपा खो दिया और गाली-गलौज, हाथापाई और मारपीट किये। विधायक कुश्वाहा डॉ शशिभूषण मेहता का विवादों से चोली-दामन का रिश्ता रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता विवादों में आए हों। पिछले सप्ताह पांकी विधानसभा क्षेत्र में सांसद प्रतिनिधि प्रिंस सिंह को लेकर ब्राह्मण-राजपूत समुदायों के बीच बैमनस्य फैलाने और उन्हें आमने-सामने लाने के प्रयास का आरोप भी विधायक पर लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बयानबाज़ी से सामाजिक तनाव बढ़ा और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई।

शिवरात्रि से एम्बुलेंस ड्राइवर पिटाई तक विवादों का लंबा इतिहास।

शिवरात्रि के दौरान पांकी में दो वर्ष पूर्व हुए हिंदू-मुस्लिम विवाद में कथित तौर पर आग भड़काने के आरोप विधायक रहते इनपर लगा था। परिणामस्वरूप महीनों तक पांकी पुलिस कैंप में तब्दील रहा आज भी दोनों समुदायों के बीच विश्वास बहाली अधूरी है। कुछ माह पूर्व लोहरदगा जिले के कुडू़ में मरीज ले जा रहे एम्बुलेंस चालक की पिटाई जिस पर राज्य भर में नाराज़गी हुई।

सत्ता का गुरूर या प्रशासन की बेबसी।

लगातार सामने आ रहे मामलों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जनप्रतिनिधि कानून से ऊपर हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि विधायक पर धनबल और कुर्सी का ऐसा गुरूर है कि न पार्टी नियंत्रण में दिखती है न प्रशासन। प्रशासन और पार्टी की चुप्पी पर सवाल अब तक इस पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई स्पष्ट नहीं।घटना की सूचना मिलने पर खलारी डीएसपी राजकुमार चौधरी दोनों पक्षों को समझाने और मामला शांत कराने की कोशिश किया। भाजपा संगठन की ओर से अबतक कोई सख्त बयान नहीं आया है। जबकि जनप्रतिनिधियों से संयम, मर्यादा और कानून के सम्मान की अपेक्षा की जाती है। जनता का सवाल अगर टोलकर्मी, एम्बूलेंस चालक और आम नागरिक सुरक्षित नहीं तो सत्ता किसके लिए है।

पलामू न्यूज Live

“ब्यूरो रिपोर्ट पलामू न्यूज Live”

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