जिंदगी हार गई, पर हिम्मत नहीं: पिता के संघर्षों और अपनों की प्रार्थनाओं को छोड़ अनंत यात्रा पर निकली दिव्या।

पलामू न्यूज Live//मेदिनीनगर (छतरपुर): जिस बेटी की किलकारियों से कभी पूरा घर चहक उठता था, जिसकी एक मुस्कान से पिता की दिनभर की थकान मिट जाती थी, आज वही बेटी पूरे परिवार को आंसुओं के समंदर में छोड़कर चुपचाप सो गई। करीब एक साल तक मौत की आंखों में आंखें डालकर लड़ने वाली छतरपुर (सिलदाग) के पत्रकार संदीप सिंह की नन्हीं परी, दिव्या कुमारी, आखिरकार जिंदगी की यह जंग हार गई। दिल्ली एम्स के सर्द कमरे में उसने शुक्रवार को अपनी अंतिम सांस ली और इसके साथ ही टूट गया एक पिता का हर वो सपना, जो उसने अपनी लाडली के लिए सजाया था।


​जब लगा कि जीत गई जिंदगी… और फिर ठहर गई हर सांस।

दिव्या पिछले नौ महीनों से बनारस के अस्पताल में ब्लड कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ रही थी। दवाइयों के कड़वे घूंट, सुइयों का असहनीय दर्द और अनगिनत रातों का रतजगा—मासूम दिव्या ने हर दर्द को हंसकर सहा। जब बनारस में इलाज के बाद वह ठीक होकर अपने गांव सिलदाग लौटी, तो लगा कि मानो किसी अंधेरी सुरंग के बाद उजाला आ गया हो। बुझते हुए दीये में फिर से तेल पड़ गया था। पिता की आंखों में उम्मीद की नई चमक थी कि उनकी बेटी ने मौत को मात दे दी है। लेकिन कौन जानता था कि नियति ने पीछे से एक और वार छिपा रखा था।
​एम्स का वो सर्द कमरा और एक असहाय पिता की चीख
​घर लौटने के कुछ ही दिनों बाद, इलाज के भारी साइड इफेक्ट्स ने मासूम के शरीर को तोड़ना शुरू कर दिया। अचानक दौरे पड़ने लगे और दिव्या तड़पने लगी। लाचार पिता अपनी कलेजे के टुकड़े को लेकर भागते हुए दिल्ली एम्स पहुंचे। डॉक्टरों की टीम ने हर मुमकिन कोशिश की, पिता ने अपनी सांसें तक दांव पर लगा दीं, लेकिन इस बार किस्मत पत्थर दिल हो चुकी थी। शुक्रवार को जब डॉक्टरों ने जवाब दे दिया, तो एम्स की गलियारे एक पिता की बेबस चीखों से कांप उठे।


​पीछे छोड़ गई कभी न भरने वाला जख्म

​आज छतरपुर का हर शख्स खामोश है। जो भी दिव्या के जाने की खबर सुन रहा है, उसकी आंखें नम हो जा रही हैं। एक मासूम बच्ची की तस्वीरें देखकर लोग अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। दिव्या भले ही आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन एक बेबस पिता का अपनी बेटी को बचाने के लिए किया गया वो हर मुमकिन संघर्ष और एक मासूम का वो दर्दनाक सफर, इतिहास के पन्नों पर आंसुओं से लिखा जा चुका है।
​ईश्वर से यही प्रार्थना है कि मासूम दिव्या की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और इस बज्रपात को सहने के लिए संदीप सिंह जी के परिवार को असीम शक्ति प्रदान करें।
​अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।

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