पलामू की गलियों से जामताड़ा के एनकाउंटर तक: कैसे ढहा झारखंड के ‘क्राइम सिंडिकेट’ का बेताज बादशाह सुजीत सिन्हा।

पलामू न्यूज Live//मेदिनीनगर: झारखंड में दहशत का दूसरा नाम बन चुका कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा अब अतीत का हिस्सा बन गया है। रंगदारी, हत्या और ‘जेल सिंडिकेट’ के बल पर पूरे राज्य के कोयला कारोबारियों और बिल्डरों की नींद उड़ाने वाला सुजीत सिन्हा जामताड़ा जिले के सुपायडीह बाईपास पर रविवार कि रात्रि में हुई पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। पलामू के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ उसका आपराधिक सफर, जामताड़ा की सड़क पर पुलिस की गोलियों से खत्म हो गया। आइए जानते हैं पलामू से लेकर उसके अंतिम समय तक की पूरी दास्तान।

अपराध की शुरुआत: टेंडर विवाद और दोहरा हत्याकांड (2007)

सुजीत सिन्हा मूल रूप से पलामू जिले के हुसैनाबाद (पथरा गांव) का रहने वाला था, हालांकि उसकी परवरिश मेदिनीनगर में हुई।
​पहला बड़ा कांड: वर्ष 2007 में पलामू के टाउन थाना क्षेत्र में रंगदारी और टेंडर विवाद में दो सगे भाइयों (अनिल सिंह और भूषण सिंह) की सरेआम हत्या कर दी गई थी। इस दोहरे हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार सुजीत सिन्हा ही था। इसी वारदात के बाद झारखंड के अपराध जगत में सुजीत सिन्हा नाम का खौफ तेजी से फैलने लगा।
​उसने जेल के अंदर से ‘क्राइम सिंडिकेट’ और वासेपुर से साठगांठ कर 50 से अधिक जघन्य मामलों (हत्या, अपहरण, रंगदारी, आर्म्स एक्ट) में नामजद सुजीत सिन्हा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा, लेकिन उसकी खौफ की दुकान बंद नहीं हुई।

गैंग का विस्तार।

उसने जेल में रहते हुए कुख्यात गैंगस्टर अमन साव के साथ हाथ मिलाया और हाल के वर्षों में वासेपुर के प्रिंस खान गैंग के साथ मिलकर एक नया आपराधिक नेटवर्क खड़ा किया। वह जेल के भीतर से ही ठेकेदारों और कारोबारियों को फोन पर धमकियां दिलवाता और करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूलता था। गुमला जेल में बंद रहने के दौरान अपने गुर्गों के साथ शराब पार्टी करते हुए उसकी तस्वीरें भी वायरल हुई थीं।

​’लेडी डॉन’ प्रेमिका और पत्नी का कनेक्शन

जब सुजीत सिन्हा जेल में था, तब उसके साम्राज्य को बाहर से संभालने के लिए उसके करीबी रिश्तेदार और महिलाएं आगे आईं,
​’लेडी डॉन’ प्रियंका पलामू की बीसीए पास प्रियंका कुमारी (सृष्टि) सुजीत सिन्हा की प्रेमिका थी। सुजीत के जेल जाने के बाद प्रियंका ने गैंग की कमान संभाली और ‘लेडी डॉन’ बनकर कारोबारियों से रंगदारी वसूलने लगी। सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा भी इस आपराधिक सिंडिकेट की साजिशों और पैसों के लेनदेन में शामिल रही, जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

जामताड़ा एनकाउंटर: जानिए कैसे हुआ अंत

साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल शिफ्टिंग के दौरान।
सुपायडीह बाईपास (गोविंदपुर-साहिबगंज हाईवे) जामताड़ा में  साहिबगंज जेल से धनबाद ले जाते समय जामताड़ा के पास पुलिस एस्कॉर्ट वाहन का टायर अचानक पंचर हो गया। इसी दौरान जवानों द्वारा उसे दूसरी गाड़ी में शिफ्ट किया जा रहा था, तभी अंधेरे और मौके का फायदा उठाकर सुजीत ने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीन लिया और गोलियां चलाते हुए भागने लगा। पुलिस टीम ने त्वरित आत्मरक्षार्थ कार्रवाई की और जवाबी फायरिंग में सुजीत सिन्हा को गोलियां लगीं। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

दहशत के एक अध्याय का अंत

झारखंड पुलिस के लिए सुजीत सिन्हा का मारा जाना एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। पलामू से शुरू हुआ सुजीत सिन्हा का साम्राज्य कई परिवारों के आंसुओं और खौफ की नींव पर खड़ा था, जिसका अंत जामताड़ा के बाईपास पर गोलियों की गूंज के साथ हो गया। एनएचआरसी (NHRC) के गाइडलाइन्स के तहत मामले की फोरेंसिक और कानूनी जांच जारी है।

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