भारत का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट CMS-03 हुआ लॉन्च, इसरो ने रचा इतिहास।
पलामू न्यूज Live//भारत की अंतरिक्ष और रक्षा क्षमता को एक नई ऊंचाई पर ले जाते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2 नवम्बर 2025 दिन रविवार को देश का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 (GSAT-7R) सफलतापूर्वक लॉन्च किया। करीब 4,410 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट भारतीय नौसेना की सुरक्षित संचार व्यवस्था और समुद्री निगरानी को और मजबूत करेगा।
यह लॉन्च इसरो के भरोसेमंद रॉकेट LVM-3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) से आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से किया गया। कुछ ही समय बाद सैटेलाइट सफलतापूर्वक जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित हो गया। CMS-03 सैटेलाइट 2013 में लॉन्च हुए GSAT-7 ‘रुक्मिणी’ का अपग्रेडेड वर्जन है।
यह नए जमाने की मल्टी-बैंड टेक्नोलॉजी से लैस है जो C एक्सटेंडेड C और Ku बैंड में काम करेगी। इसकी मदद से नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों, गश्ती विमानों और तटीय कमांड सेंटर्स के बीच तेज़, सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड संचार संभव होगा। इसरो के अधिकारियों के मुताबिक यह सैटेलाइट नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर को सपोर्ट करेगा।
जिससे नौसेना को बेहतर रीयल टाइम जानकारी समन्वय और निगरानी में मदद मिलेगी। इसमें उन्नत एन्क्रिप्शन सिस्टम और विस्तारित फ्रीक्वेंसी रेंज (UHF और S-बैंड सहित) दी गई है, जिससे यह दुर्गम समुद्री क्षेत्रों में भी लगातार कनेक्टिविटी बनाए रखेगा। CMS-03 का कवरेज पूरा भारतीय उपमहाद्वीप और हिंद महासागर के बड़े हिस्से तक फैला है।
यह भारत की Maritime Domain Awareness (MDA) प्रणाली का अहम हिस्सा बनेगा। जिससे समुद्र में किसी भी खतरे की पहचान और उस पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी। यह उपग्रह कई स्वदेशी तकनीकों से बना है, जो भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और अंतरिक्ष रक्षा क्षमता को दर्शाता है। CMS-03 के सफल प्रक्षेपण के साथ इसरो ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह न केवल वैज्ञानिक बल्कि रणनीतिक जरूरतों को भी मजबूती से पूरा कर रहा है।
यह सैटेलाइट भारत के लिए एक अत्याधुनिक स्पेस-बेस्ड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म साबित होगा, जिससे देश की समुद्री सीमाएं और भी ज्यादा सुरक्षित होंगी। अब भारतीय नौसेना के पास है एक ऐसा सैटेलाइट सिस्टम जो हिंद महासागर से लेकर इंडो-पैसिफिक तक भारत की निगरानी और संचार क्षमता को नई शक्ति देगा।

