किसी भी देश के सम्पूर्ण विकास के लिए उच्च व तकनीकी शिक्षा एक बुनियादी आवश्यकता होती है:जेकेएम।

पलामू न्यूज Live//पलामू जिले के मेदिनीनगर में झारखण्ड क्रांति मंच के केन्द्रीय अध्यक्ष शत्रुघ्न कुमार शत्रु ने एक प्रेस बयान जारी किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि देश भर के विश्वविद्यालयों में बढ़ते जातिय उत्पादन व भेदभाव को रोकने के लिए। यूजीसी बिल को लागू करना केन्द्र सरकार का सकारात्मक कदम है, जिसका पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर स्वर्ण समाज द्वारा विरोध निंदनीय है। जारी बयान में उन्होंने कहा है कि किसी भी देश के सम्पूर्ण विकास के लिए उच्च व तकनीकी शिक्षा एक बुनियादी आवश्यकता होती है। इसके लिए विश्वविद्यालयों में छात्रों व शिक्षकों के बीच सौहार्दपूर्ण शैक्षणिक माहौल जरुरी है। लेकिन जिस तरह से रोहित बेमुला व डा०पायल तड़वी आदि को जातिय उत्पीड़न व भेदभाव के तहत संस्थानिक हत्या का सामना करना पड़ा है, वह देश के विश्वविद्यालयों पर बदनुमा दाग है। सबको पता है कि इस संदर्भ में श्री दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में गठित संसदीय समिति ने विश्वविद्यालयों में 118% से ज्यादा जातिय उत्पीड़न व भेदभाव बढ़ने पर चिंता जताते हुए यूजीसी बिल को आवश्यक रूप से लागू करने की सिफारिश की है जो स्वागत योग्य है। बयान के अंत में श्री सत्रु ने कहा है कि किसी भी जाति के शिक्षक व छात्र-छात्राएं जो जातिय उत्पीड़न व भेदभाव नहीं करते हैं उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। निश्चित रूप से जो जानबूझकर डर पैदा कर इस बिल का विरोध कर रहे हैं वे घनघोर जातिवादी व उत्पीड़क सोच से ग्रस्त हैं। जो रैगिंग व उत्पीड़न को हथियार बनाकर सबको उच्च शिक्षा के अधिकार से वंचित रखकर वंचितों को पांच हजार वर्षो पूर्व की अमानुषिक गुलामी में धकेलने का सपना देख रहे हैं जिसे एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के लोग समझ रहे हैं। जरुरत पड़ी तो यहां भी यूजीसी बिल के समर्थन में आन्दोलन किया जाएगा।

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“ब्यूरो रिपोर्ट पलामू न्यूज Live”

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