पलामू जिला प्रशासन की खुली पोल,10 वर्ष पूर्व जिस भवन को जर्जर व अनुपयोगी बताया, उसी भवन में अब आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने का दिया निर्देश।
पलामू न्यूज Live//पलामू में सरकारी व्यवस्था की मजबूरियों के कारण क्या नौनिहालों की सुरक्षा से समझौता किया जा सकता है, यदि समय रहते ठोस और सुरक्षित समाधान नहीं निकाला गया तो इसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करना भी उन्हें आवश्यक होगा। पलामू जिले के नीलांबर पीतांबरपुर प्रखंड अंतर्गत हरतुआ पंचायत के रामानंद डबरा गांव में किराए के कमरे में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रही थी।
इसका मुद्दा पांकी विधायक कुश्वाहा डॉ. शशि भूषण मेहता ने विधानसभा में जैसे ही उठाया तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद एसडीओ, बीडीओ, पर्यवेक्षिका सहित अन्य अधिकारी रामानंद डबरा गांव पहुंचे।
हालांकि समाधान के नाम पर जो कदम उठाया गया है उससे ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ा दिया गया है। प्रशासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र को किराए के भवन से हटाकर हरतुआ स्थित एक अन्य पुराने एवं जर्जर भवन में स्थानांतरित कर दी गई है।
ग्रामीणों के अनुसार यह भवन पोषक क्षेत्र से लगभग एक किलोमीटर दूर है, जिससे छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को आने-जाने में बहुत कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा। सबसे गंभीर बात तो यह है कि संबंधित भवन को करीब दस वर्ष पूर्व ही विभाग द्वारा जर्जर घोषित कर अनुपयोगी बताया जा चुका है तो अब उसमें आंगनबाड़ी केंद्र कैसे संचालित होगा।
वर्तमान में उस भवन की स्थिति और भी खराब है फर्श टूटा हुआ है, दीवारों में चौड़ी दरारें हैं तथा परिसर में सांप-बिच्छुओं का खतरा बना रहता है। उस भवन में पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है, इसके अतिरिक्त भवन मुख्य सड़क से सटा हुआ है जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
इस मामले को लेकर पश्चिमी जिला पार्षद आशा देवी, हरतुआ पंचायत के मुखिया अरविंद शुक्ला, वार्ड सदस्य तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रस्तावित स्थानांतरण का विरोध किया है। उन सभी लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन गंभीर था तो नए आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की पहल की जानी चाहिए थी।
बच्चों को पहले किराए के कमरे में और अब पुराने जर्जर भवन में स्थानांतरित करना प्रशासनिक असंवेदनशीलता को दर्शाता है। ग्रामीणों ने उपायुक्त पलामू तथा संबंधित विभाग से मांग की है कि जब तक नए भवन का निर्माण नहीं हो जाता है तब तक आंगनबाड़ी केंद्र को वर्तमान किराए के भवन में ही संचालित किया जाए या गांव के विद्यालय में एक सुरक्षित कक्ष उपलब्ध कराया जाए।
विवाद के बीच आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका भी असमंजस की स्थिति में हैं। उन्हें एक ओर विभागीय निर्देशों का पालन करना है तो दूसरी ओर ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

