पांकी विधायक ने बालू की आसमान छूती कीमतों और आम जनता की परेशानीयों पर सदन में उठाया सवाल।
पलामू न्यूज Live//रांची: झारखण्ड विधानसभा बजट सत्र के दौरान पांकी विधायक कुश्वाहा डॉ शशिभूषण मेहता ने ‘खान एवं भूतत्व विभाग’ से अल्प-सूचित प्रश्न (संख्या-अ०सू०-15) के माध्यम से राज्य में बालू (Sand) की अत्यधिक दरों और उसकी उपलब्धता की समस्या का गंभीर मुद्दा उठाया।
पांकी विधायक के द्वारा सरकार से सदन में पूछे गए विभिन्न प्रश्न, सरकार के द्वारा मिली निम्नलिखित जवाब।
पांकी विधायक के द्वारा सदन में सरकार से पूछा गया सवाल क्या यह सही है कि झारखण्ड में कैटेगरी-2 श्रेणी के बालू घाटों में बालू की दर ₹12.80 प्रति घन फीट तय की गई है। जिसमें सरकार की ओर से स्वीकारात्मक जवाब आया (सरकार ने माना कि यह दर तय है)।
क्या तय दर के अतिरिक्त रॉयल्टी, परिवहन और संवेदक के मुनाफे को मिलाकर बालू की आपूर्ति दर लगभग ₹4,000 से ₹5,000 प्रति 100 घन फीट हो जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि ₹50 प्रति घन मीटर रॉयल्टी के अतिरिक्त रॉयल्टी का 10% DMFT, 1% पर्यावरणीय शुल्क और ₹1 प्रति टन मैनेजमेंट फी तथा अन्य कर नियमानुसार वसूले जाते हैं।
विधायक के द्वारा किए गए प्रश्न क्या कैटेगरी-1 की श्रेणी में केवल छोटे घाटों को रखने से पर्याप्त मात्रा में बालू मिल पाना असंभव नहीं है। सरकार कि ओर से अस्वीकारात्मक उत्तर आया, सरकार का तर्क है कि ‘झारखण्ड बालू खनन नियमावली, 2025’ के तहत छोटे घाटों (First & Second order stream) को कैटेगरी-1 में रखा गया है। जहाँ से गैर-व्यावसायिक कार्यों के लिए पंचायत स्तर पर बालू का उठाव किया जाता है।
पांकी विधायक ने सदन में किया चौथा प्रश्न उन्होंने कहा कि सरकार जनहित में बालू को ₹3 प्रति घन फीट की सस्ती दर पर उपलब्ध कराने का विचार रखती है। जिसका अस्वीकारात्मक जवाब आया, सरकार ने बताया कि पूर्व में (2018 में) दर ₹7.50 थी, लेकिन वर्तमान नियमावली के तहत ई-नीलामी प्रक्रिया के लिए सुरक्षित जमा राशि का निर्धारण ₹1280 प्रति 100 घन फीट के आधार पर किया गया है।
विधायक ने कहा कि बालू की कीमतें बढ़ने से आज आम आदमी के लिए अपना छोटा सा आशियाना बनाना भी दूभर हो गया है सरकारी दर और बाजार की दर में जमीन-आसमान का अंतर है। पांकी विधायक ने झारखंड सरकार से सदन की माध्यम से पुरजोर मांग की है कि बालू की कालाबाजारी रोकी जाए और जनता को सस्ती दरों पर बालू उपलब्ध कराई जाए उन्होंने कहा कि जनहित की यह लड़ाई जारी रहेगी सरकार को हर हाल में आम जन की बातों को मानना ही पड़ेगा।
वहीं पांकी विधायक कुश्वाहा डॉ शशिभूषण मेहता ने अपने विधानसभा क्षेत्र के नीलांबर पीतांबरपुर प्रखंड अंतर्गत हरतुआ पंचायत के मुखिया अरविंद शुक्ला के द्वारा पंचायत क्षेत्र में विभिन्न कार्यों में गबन करने की मामला को लेकर सदन में उठाया मुद्दा।
सरकार से मांग किया है कि हरतुआ पंचायत के मुखिया अरविंद शुक्ला का वित्तीय शक्ति को जप्त कर जांचोपरांत उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई किया जाए।

