पलामू में सरकारी स्तर पर धान क्रय केंद्र नही खुलने से किसान परेशान, बिचौलियों की चांदी।

पलामू न्यूज Live//झारखंड के पलामू जिला अंतर्गत दर्जनों किसानों कि अथक मेहनत के बदौलत खेतों से धान काट उसे साफ-सुथरा कर बेचने के लिए तैयार तो कर लिया गया है। लेकिन जब किसान धान बेचने जा रहे हैं तो उसे निराशा ही हाथ लग रही है। सरकार धान पर MSP 24.69रु तय किया है किन्तु जिले में अब तक धान क्रय केंद्र नही खोले जाने से बाजार में लोकल व्यापारी/बिचौलियों की चांदी है। किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने में शामिल बिचौलिये 14-15 रु प्रति किलो धान खरीद रहे हैं। दिसम्बर का पहला पखवाड़ा खत्म होने को है सरकार अबतक धान क्रय केंद्र खोलने की तारीख तक तय नही कर पायी है। किसानों की मजबूरी है कि खाली खेत मे अगली फसल लगानी है उसके लिए खाद बीज और खेतो की जुताई, बच्चों की पढ़ाई और घर की दवाई समेत दैनिक ख़र्च की व्यवस्था करनी है। किसानों के सामने कोई विकल्प नही बचा है और मजबूरी में उन्हें धान बेचना पड़ रहा है। अगर पड़ोसी राज्यों की बात करें तो वहां की सरकार 15 नवम्बर से 31 रु प्रति किलो धान खरीद रही है और धान की राशि का भुगतान 72 घंटे के भीतर किसानों को किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों से उनके पास उपलब्ध जमीन में 21 क्विंटल प्रति एकड़ तय कर रखी है और 15 नवंबर से 31 रु प्रति किलो धान खरीद रही है। वहीं उड़ीसा सरकार ने भी 31.69 पैसे और नवम्बर से क्रय करने लगी है वहाँ भी भुगतान अगले 72 घंटे के अंदर किसान को हो जाता है। इसी तरह असम सरकार 26.19रु, केरल सरकार 28.69रु, बंगाल सरकार 23.89रु, उत्तर प्रदेश सरकार 23.69रु खरीद करती है। किन्तु सबसे अच्छी बात यह है कि वहां अक्टूबर से ही खरीद शुरू होता है और अगले 48 घंटे में पैसा किसान के खाते में आ जाता है। इन वजहों से वहां बिचौलियें पनप नही पाते हैं और सीधा लाभ किसानों को होता है। किंतु झारखंड की स्तिथि उल्टा है यहां समय पर धान की खरीद शुरू नही होता। भुगतान की कोई गारंटी नहीं है और राज्य सरकार द्वारा बोनस या सब्सिडी मात्र एक रु. प्रति किलो है जो अन्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में नही के बराबर है। केंद्र सरकार 23.69रु न्यूनतम समर्थन मूल्य देती है इस तरह सरकार के उदासीन रवैया से न्यूनतम समर्थन मूल्य से 900 रु से 1000 रु प्रति क्विंटल का नुकसान यहां के किसानों को उठाना पड़ रहा है। किसान अपनी गाढ़ी मेहनत की उपज ही नही अपने अरमान भी मिट्टी के मोल बेचने को मजबूर हैं और सरकार का वादा सिर्फ आश्वासन भर ही साबित हो रहा है। पहाड़ी कला के किसान ब्रह्मदेव सिंह ने बताया कि हमे अधूरे घर का निर्माण कार्य पूरा करना है साथ ही खाली हुए खेत मे अगली फसल लगानी भी है। सरकार अबतक खरीद शुरू किया ही नही है सरकार के खरीदी के भरोसे रहेंगे तो न खेत मे अगली फसल लगा पाएंगे और न अधूरे घर को पूरा कर पाएंगे। यही हाल सुरेश सिंह का है वे 120 क्विंटल धान पैदा किये है इसी दिसंबर में उनकी लड़की की शादी है उनका भी 100 क्विंटल का रजिस्ट्रेशन हुआ है। किंतु सरकार पैक्स के माध्यम से धान क्रय केंद्र खोली ही नही है ऐसी परिस्थिति में उन्हें भी स्थानीय व्यापारी के पास 1400रु. प्रति क्विंटल के दर से धान बेंचना पड़ रहा है। यह स्तिथि सिर्फ एक ब्रह्मदेव और सुरेश सिंह की नही बल्कि सभी किसानों की है। अगर समय पर अन्य राज्यों की भांति यहां भी सरकार नवम्बर से धान खरीद शुरू करती तो यहां के किसानों को 900 से 1000 रु प्रति क्विंटल नुकसान नहीं उठाना पड़ता। जिसका असर किसानों के आर्थिक स्थिति पर होता गांव के किसान आत्म निर्भर और मजबूत रहेंगे  तब ही देश विकास करेगा। अगर यहां की सरकार द्वारा किसानों को बोनस(केंद्र सरकार द्वारा जारी MSP 23.69) की तुलना पड़ोसी राज्यों से करें तो छत्तीसगढ़ सरकार 7.31रु, उड़ीसा सरकार 8 रु, असम सरकार 2.50रु, केरल सरकार 5रु प्रति किलो अपने किसानों को देती है। जबकी झारखंड सरकार अपने यहां के किसानों को मात्र एक रुपये देती है लेकिन खरीदारी तब शुरू करती है जब किसान अपना धान बिचौलिये के हाथों बेंच चुका होता है। इस तरह यहां के किसान सरकार के उदासीन रवैये के कारण अन्य राज्यों के किसानों की अपेक्षा मजबूर और लाचार है और किसानों का लाभ बिचौलिये उठा रहे है।

पलामू न्यूज Live

“ब्यूरो रिपोर्ट पलामू न्यूज Live”

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