लेस्लीगंज रमज़ान की रूहानी शब में मुकम्मल हुआ तरावीह, हाफिज साहब की पगड़ी पोशी कर किया गया सम्मानित।

पलामू न्यूज Live//रमज़ान-उल-मुबारक की पाक रातों में इबादत का सिलसिला जारी है और इसी बरकत से भरी शब में नीलाम्बर-पीताम्बरपुर के कोट मोहल्ला स्थित छोटी मस्जिद में तरावीह की नमाज़ में क़ुरआन मुकम्मल कर ली गई। बीती रात 20 रमज़ान के जुम्मे की मुबारक रात में हाफिज साहब ने मुकम्मल कुरआन पाक सुनाया जिसके बाद पूरे इलाक़े में रूहानी माहौल बन गया। इस मौके पर मस्जिद में मिलाद शरीफ का आयोजन हुआ जिसमें अकीदतमंदों की बड़ी तादाद देखी गई। रमज़ान जिसे क़ुरआन का महीना कहा गया है इबादत, रहमत और मग़फ़िरत का पैग़ाम लेकर आता है।
यह महीना खुदा की बंदगी और कुरआन की तिलावत का खास वक्त होता है। इसी बरकत के साथ जब हाफिज साहब ने मुकम्मल कुरआन सुनाया तो पूरे माहौल में सुकून और अकीदत की लहर दौड़ गई।
तरावीह के बाद हाफिज साहब की पगड़ी पोशी कर उन्हें सम्मानित किया गया और उन्हें उपहार देकर हौसला अफजाई की गई। इस मौके पर मस्जिद कमेटी के सदस्य, बुजुर्ग, और स्थानीय लोग बड़ी तादाद में मौजूद रहे।
सभी ने रमज़ान की इस पाक रात में इबादत की अहमियत को समझते हुए खुदा से रहमत और बरकत की दुआ मांगी। पूरी महफ़िल में रूहानियत और सुकून का समां बंधा रहा।
वहीं मौके पर हाफीज साहब ने कहा कुरआन पाक में खुदा फरमाता है। शहरु रमज़ान अल्लज़ी उन्ज़िला फ़ीहि अल-कुरआन, हुदल्लीन्नास व बय्यिनातिम मिनल-हुदा वल-फ़ुरकान रमज़ान का महीना वह है।
जिसमें कुरआन नाज़िल किया गया जो इंसानों के लिए हिदायत है और सच्चाई व झूठ के बीच फर्क करने वाली किताब है। यह पाक महीना सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि अपने रब की बंदगी, दूसरों की मदद और अपने गुनाहों से तौबा करने का बेहतरीन मौका है।
रमज़ान की हर रात रहमतों से भरी होती है और इस दौरान की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।